लखनऊ में टप्पेबाजी गैंग का भंडाफोड़, 3 महिलाएं और 1 पुरुष गिरफ्तार

लखनऊ

ऑटो, टेंपो और ई रिक्शा यात्रियों को उलझाकर जेवर चोरी व टप्पेबाजी करने वाले महिला गैंग का खुलासा करते हुए कृष्णानगर पुलिस ने तीन महिलाओं और एक पुरुष को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के पास से चोरी की गई सोने की चेन, एक अंगूठी और पायल बरामद की गई है।

डीसीपी दक्षिणी अमित आनंद ने बताया कि कृष्णानगर इलाके में नवंबर 2025 से बीते मार्च माह के बीच टप्पेबाजी की तीन घटनाएं घटी थीं। इस मामले में कृष्णानगर पुलिस की एक टीम को आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगाया गया था।

पुलिस टीम ने घटनास्थल और उसके आसपास लगे 600 से 700 सीसीटीवी कैमरों को चेक किया और वारदात को अंजाम देने वाले गैंग का पता लगाते हुए मंगलवार को डूडा कॉलोनी आशाराम बापू मार्ग मानसनगर से दुबग्गा सीतापुर बाईपास झुग्गी झोपड़ी निवासी शेषकला, उसके पति दयालाल, पूजा और गौरी देवी को गिरफ्तार किया। शेषकला, दयालाल और पूजा मूल रूप से नागपुर के रहने वाले हैं, जबकि आरोपी गौरी देवी बिहार के आरा की निवासी है।

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महिला दरोगा ने सादे कपड़े में एक हफ्ते तक रेकी की
एसीपी कृष्णानगर रजनीश वर्मा ने बताया कि इस गैंग का पकड़ने में कृष्णानगर थाने पर तैनात महिला दरोगा सिद्धि मिश्रा की सबसे अहम भूमिका रही। फुटेज मिलने के बाद उन्होंने सादे कपड़े में कई दिनों में घूम-घूम कर गैंग के बारे में पता किया।

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इसके बाद उन्होंने गैंग के निवास स्थान की पूरी रेकी कर जानकारी जुटाई और फिर पुलिस ने इस गैंग पकड़ा। एसीपी ने बताया कि शेषकला इस गैंग की लीडर है और पहले से उनके खिलाफ बख्शी का ताला, मड़ियांव, हरदोई, नाका में चोरी के कई मामले दर्ज हैं।
उल्टी करने के बहाने या पिन चुभोकर वारदात को देते थे अंजाम

एसीपी ने बताया कि पूछताछ में पकड़े गए आरोपियों ने बताया कि वह लोग ऑटो, टेंपो और ई रिक्शा में सफर करने वाले ऐसे वृद्धों को शिकार बनाते थे जो जेवर पहने होते थे। आरोपी महिलाएं उसी वाहन में सवार तो जाते थे, जिसमें पीड़ित बैठते थे।

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सफर के दौरान आरोपी महिलाएं उल्टी करने या पीड़ित को सेफ्टी पिन चुभोकर उनको उलझा कर जेवर चोरी कर लेते थे। आरोपी नागपुर से ट्रेन से लखनऊ व अन्य शहरों में जाकर इलाज के नाम पर या फेरी लगाने के बहाने से भीड़भाड़ वाले इलाके में वारदात को अंजाम देते थे।

बार-बार पता बदले देते थे
आरोपी पूछताछ में पुलिस को इस बात का पता चला है कि पुलिस से बचने के लिए आरोपी न सिर्फ अपना ठिकाना बदलते थे, बल्कि आधार कार्ड पर भी पता बदलवा लेते थे। ऐसे में इनको ट्रेस करना पुलिस के लिए मुश्किल होता था।

 

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